Aisa Kyu? | Poem | Marathi | By Essence Of Books

Dhanashree Patil Jan 10th, 2026 1 min read

Poem :

ऐसा क्यू ?

ऐसा क्यु है, के तु मेरे तरफ देखे तो मेरे पुरे शरीर पे बुर्खा, और तेरे आखो पे छोटा कपडा तक नहीं ॥
तुझे बिगड़ने की पुरी मुभा है, और मेरे पास सास लेने के लिए खुली हवा तक नही ।।
अगर में किसी लड़के से सीर्फ बात भी कर लु तो मुझे कोसने के लिए पुरा समाज पड़ा है।
और अगर तु किसी लडकी को छेड़ दे, या उसका Rape भी कर दे, तो तुझे रोकने वाला काई नही ।।
ऐसा क्यु के, तु रातभर सडको पे भटकता फिरे, और मे घर से बहार निकलने के लिए भी डरु,
समाज की इस घटीया सोच के वजेसे अपनेआप मे ही बदलाव करू ॥
ऐसा क्यु होता है के, लडकीयों का पुरा झुंड भी खडा हो तो लडका जान बुजके वहि से जाता है,
और अगर रास्ते मे अकेला लड़का भी हो, तो लड़की को अपना रास्ता बदलना पड़ता है।।
ऐसा क्यु, के तेरे मा-बाप तुझे Night out के लिए भी यू इजाजत देते हैं,
और मेरे मा-बाप मुझे स्कुल में अकेले भेजते वक्त भी इतना ज्यादा डर जाते है।।
तेरे पास जो तु चाहे वो करने की आझादी है, और में सिर्फ समाज के इजाजत कि मौताज।
ये सिंसिला अब और नहीं चलने देंगे, चल इसकी भी शपथ साथ मिलकर ले ले आज ।


~धनश्री पाटील.